अगर तुम होते
तो तूफ़ान आता ज़रूर, पर कुछ बर्बाद न होता
अगर तुम आते
तो शायद कभी न आती बरसातों की वह काली रात
अगर तुम होते साथ
तो फूल खिल जाते, तारे चमक उठते, मैं चहकती
अगर तुम आ जाते
तो शायद न होता डर, कुछ पाने या खोने का।
क्योंकि तुम नहीं होते
इसीलिए तूफ़ानों को हरा देती हूं मैं
क्योंकि तुम नहीं आते
इसीलिए खून के छाप पड़ते हैं उन बर्फों पर
मगर उनकी नदियां नहीं बहतीं गंगोत्री से
क्योंकि तुम नहीं होते मेरे साथ
इसीलिए मैं अकेली हूं, डरती हूं, पर जानती हूं
कि कांप नहीं रहा है पूरा भारत
क्योंकि तुम नहीं आ पाते
इसीलिए छूट जाते हैं तुम्हारे साथ मेरे लम्हें
पर कम नहीं होते लोगों के पास वीरता के किस्से।
आसान नहीं होता
तुम जैसों का साथ निभाना
आसान नहीं होता
मुझसे ज्यादा, तुम्हें किसी और से प्यार करने देना
आसान नहीं होता
आंखों को काबू कर हाथों को मज़बूत बनाना
आसान नहीं होता
देश का बेटा, देश की बेटी बनना।
नमन इन्हें
नमन उन्हें
जो दे रहे इनका साथ
नमन उन्हें भी
जो देश के भीतर रहकर, कर रहे देश को प्यार
नमन उन सबको
जो देश में हैं या नहीं हैं लेकिन देश के हैं-
सिर्फ उस देश का नहीं जिन्हें हमने सरहदों से
भिन्न कर रखा है, बल्कि
नमन हर देश को, हर सच्चे मानव, इंसान को।
ओमेशा भट्टाचार्जी (ग्यारहवीं मानविकी)
केंद्रीय विद्यालय काशीपुर कोलकाता
Nice👌
ReplyDeleteGood👍
ReplyDeleteVery nice!
ReplyDeleteVery Nice, Sir👌☺🙏
ReplyDeleteGood 👍👍
ReplyDeleteBeautiful with Depth of Meaning 💖👌💐❣️
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