- यह ब्लॉग पत्रिका रचनाकार विद्यार्थियों की कलम से निकली नवांकुरित रचनाओं का एक संकलन है।
- इस ब्लॉग पत्रिका का आरंभ विद्यार्थियों को रचनात्मक लेखन हेतु मंच प्रदान करने, उनका उत्साहवर्धन करने तथा उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है।
- यह पूर्णतया अव्यावसायिक है तथा इसमें किसी भी तरह के विज्ञापन नहीं लगाए जाते हैं।
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मेघ
हे मेघ बस एक बार तुम जमकर बरस जाओ। तुम्हारी गड़गड़ाहट सुनने के लिए तरसे हैं सब ना जाने आखिर दर्शन दोगे तुम कब अब तो हमारे ऊपर तुम जल बरसाओ...
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अगर तुम होते तो तूफ़ान आता ज़रूर, पर कुछ बर्बाद न होता अगर तुम आते तो शायद कभी न आती बरसातों की वह काली रात अगर तुम होते साथ तो फूल खिल ज...
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तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे लगा है कि हम असमर्थताओं से नहीं संभावनाओं से घिरे हैं हर दीवार में द्वार बन सकता है और हर द्वार से पूरा ...
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बचपन जीवन का बहुत ही महत्त्वपूर्ण और यादगार समय होता है। बचपन के दिन खुशियों से भरे होते हैं। मैं बचपन में पूरे दिन मौज-मस्ती ही करती थी। हम...
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