तू ही है सबसे प्यारी
तू ही है सबकी दुलारी,
करती हूं मैं तुझसे प्यार
मुझमें है तेरे संस्कार।
तू ही है मेरी आस्था
तेरे बिना जग लगता न कुछ खास-सा।
मैंने घूमा है संसार
पर मिला ना मुझको तुझसा प्यार।
तू है मेरे लिए कुछ खास
मेरे जीवन की है आस।
तू सुंदर सुशील खास है
तुझमें बसी मेरी सांस है।
जीवन का हर दुख कम हो जाता
तेरी गोद में सिर रखकर,
सारा धाम है मिल जाता
मां तेरे चरणों को छूकर।
आज की इस दुनिया में लोग
देते हैं अपनों को धोखा,
मां दुनिया में तेरे जैसा
नहीं है कोई और अनोखा।
तुझसे ही तो मेरा जीवन
आज बना धनवान है,
ईश्वर ने जो मुझे दिया है
तू पावन वरदान है।
- नीलम सिंह (११वीं विज्ञान)
केंद्रीय विद्यालय कमान अस्पताल, अलीपुर कोलकाता।