तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे लगा है
कि हम असमर्थताओं से नहीं
संभावनाओं से घिरे हैं
हर दीवार में द्वार बन सकता है
और हर द्वार से पूरा का पूरा पहाड़ गुज़र सकता है।
कविवर सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की उपरोक्त पंक्तियां मुझे बहुत प्रिय हैं। इन पंक्तियों की सार्थकता मुझे उस समय ज्यादा महसूस होती है, जब एक शिक्षक के रूप में मैं अपने विद्यार्थियों के बीच होता हूं। सचमुच उनके साथ रहकर यह अनुभव होता है कि हमारे विद्यार्थियों में कितनी संभावनाएं भरी हुई हैं। वे जिजीविषा से भरे हुए हैं, उनमें वर्तमान और भविष्य के सुनहले सपने नए-नए आकार लेते रहते हैं। असमर्थता का जहां कोई नामोनिशान नहीं होता है। वे पूरी तरह से उत्साह, साहस और ऊर्जा से भरे हुए दिखाई देते हैं। उनके विचार और चिंतन की धरातल उर्वरा होती है, कल्पना की उनमें ऊंची उड़ान होती है। उनकी भविष्योन्मुखी आंखें दुनिया को एक नई नज़र से देखने को आतुर रहती हैं।
मुझे उनके सपनों और सामर्थ्य पर भरोसा है। उन्हें देखकर मैं बेहतर भविष्य के लिए आशान्वित होता हूं। उनकी इसी रचनात्मक क्षमता को एक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से इस ब्लॉग पत्रिका की शुरुआत की जा रही है।
अतः मैं अपने सभी विद्यार्थियों को मौलिक व रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए आमंत्रित करता हूं। आप कविता, कहानी, एकांकी, यात्रा-वर्णन, डायरी, पत्र, संस्मरण आदि जिस किसी साहित्यिक विधा में अपने विचारों, भावनाओं और अनुभूतियों की अभिव्यक्ति कर सकें, आपकी रचनाओं का पत्रिका में स्वागत है। आप अपनी मौलिक रचनाएं rachnasheelpatrika@gmail.com पर भेज सकते हैं। रचनाएं उपयुक्त तथा स्व-रचित होने पर पत्रिका में प्रकाशित की जाएगी।
रचनात्मकता हमारे जीवित होने का प्रमाण है। हमें जरूरत है अपने रचनात्मक सामर्थ्य को पहचानने की तथा एक नई शुरुआत करने की। मैं यह ब्लॉग पत्रिका सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा अभिभावकों को समर्पित करते हुए एक बार फिर से कविवर सर्वेश्वर की पंक्तियों के साथ अपनी लेखनी को विराम देता हूं-
सामर्थ्य केवल इच्छा का दूसरा नाम है
जीवन और मृत्यु के बीच जो भूमि है
वह नियति की नहीं मेरी है।
